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Muktak first

 ईश्वर का  जिसने  किया, दुनियां  में  निर्मान । या तो वह जन मूर्ख था,या था चतुर सुजान ।। या था चतुर सुजान, किया यह काम विचारी । एक सलौना जाल, दिया  हम सब पर डारी ।। कह'अनंग'करजोरि, कर दिया  घर से  बेघर । मंदिर दिया बिठाय, बनाकर  जिसने  ईश्वर ।।                         अनंग पाल सिंह ॑अनंग'