ईश्वर का जिसने किया, दुनियां में निर्मान । या तो वह जन मूर्ख था,या था चतुर सुजान ।। या था चतुर सुजान, किया यह काम विचारी । एक सलौना जाल, दिया हम सब पर डारी ।। कह'अनंग'करजोरि, कर दिया घर से बेघर । मंदिर दिया बिठाय, बनाकर जिसने ईश्वर ।। अनंग पाल सिंह ॑अनंग'